Sunday, 23 March 2014
Wednesday, 19 March 2014
विश्व शांति
मलय समीरा मौसम
आदमखोर दिखाई देता है |
' विश्व शांति ' का नारा ,
कमज़ोर दिखाई देता है ||
धर्म - धर्म से टकराता है ,
सीमा - सीमा को बेध रही |
आततायी शक्तियाँ एकजुट हो ,
मानवता को है छेद रही ||
कहीं बमों का धुआँ उठे ,
कहीं छुरी तलवार चले |
रक्त रंजित हुई धरा ,
पग - पग पर आतंक मचे ||
धरती के एक अभीष्ट टुकड़े ने ,
तालिबान का निर्माण किया |
कौमी गद्दी की जिज्ञासा ने ,
आतंकी लिट्टे को जन्म दिया ||
दिल दहलाती हैं करतूतें
हिंसा करने वालों की |
आँखों में आँसू लाती है ,
हालत मरने वालों की ||
अब तो हिंसा ,
मानवता से टकराती है |
' विश्व शांति ' का उपहास ,
क्षण - क्षण वो करवाती है ||
हमने सालों - साल खो दिए,
श्वेत कपोत उड़ाने में |
' विश्व शांति ' का परचम ले ,
इस जग को समझाने में ||
पर , अहंकार की मरुभूमि ,
प्रेम - पुष्प न खिलने देती |
आरोपों - प्रत्यारोपों की डोरी ,
बंधुत्व को न बँधने देती ||
जन - जन की अभिक्षिप्त वाणी ,
आह्वान करती मानवता का |
शांति बीज के बोने वालों ,
अब समय नहीं है सोने का ||
अब , इन कोहराम भरी रातों का
ढलना ज़रूरी है |
घोर तिमिर में एकता की मशाल का
जलना ज़रूरी है ||
Monday, 17 March 2014
विरही राधा की अरदास
मथुरा में बसकर नंद नंदन ,
तुम राधा को क्यों भूल गए |
कुबजा के संग खेली होली ,
सखियों को रंगना भूल गए ||
जमुना तट पर खड़ी विरही ,
तेरी बाट निहार रही |
आएँगे प्रियतम मेरे ,
मन में यही विचार रही ||
झूमेंगी गोकुल की गलियाँ ,
नव पल्लव की हरियाली में |
गऊओं की रम्भार कहेगी ,
बीतेंगे दिन खुशहाली में ||
ग्वालों की निकलेगी टोली ,
लेकर रंग भरी पिचकारी |
छूटेंगी न एको सखियाँ ,
गोरी , साँवली या कली ||
भावों का अम्बार सजा है ,
रस्ता देख रही राधा प्यारी |
सावन बीता आया फागुन ,
अब तो आ जाओ गिरधारी ||
होली में विरही
आसमान में उड़े गुलाल ,
पिचकारी की चले फुहार |
ऐसे में एक विरही मन को ,
अपने प्रियवर की है दरकार ||
सावन बीता आया फागुन ,
बीती वासंती रस की धार |
पर तुम न आए प्रियतम ,
परदेशी बन क्यों फिरी निगाह ||
अब तो आओ साजन मेरे ,
क्षण - क्षण दिल की यही पुकार |
बाट निहारू उस दर प्रियतम ,
जहाँ सुनूँ तेरी कोमल पग - चाप ||
आलिंगन में भर कर मुझको ,
प्रेम रंगों का करो मिलान |
प्रेमाश्रय का दे कर उपहार ,
उदन्य हृदय में भरो ऊजास ||
प्रिय रंग की लाली में रंग ,
लज्जा का मैं करूँ श्रृंगार |
मेरे लालायित विरही मन को ,
अपने प्रियवर की है दरकार ||
Saturday, 15 March 2014
Tuesday, 11 March 2014
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