Saturday, 28 March 2015

पिया मिलन की आस



मन वीणा के झनके तार ,
पिया मिलन की आई रात |                     
सकुचाती , इठलाती पहुँची द्वार ,
पिया मिलन की मन में आस ||
      उनके रंग में रंग जाऊँगी ,
      दूजा रंग न मन भाऊँगी |
      अधरों पर अधरों की लाली ,
      खिल मन में इठलाऊँगी ||
आज रति ने छेड़ी मधुतान ,
पिया मिलन की मन में आस ||
      गलबाहों का हार पहनाकर ,
      मंद – मंद मुसकाऊँगी |
      श्वासों की मणियों से ,
      भावों को खूब सजाऊँगी ||
आज आया जीवन में मधुमास ,
पिया मिलन की मन में आस ||
      तन – मन की दूरी का ,
      हर आयाम मिटाउँगी |
      प्रेमपाश में डूब पिया के ,
      अवगुंठित भावों को पंख लगाऊँगी ||
आज अहसासों ने खोली पाल ,
पिया मिलन की मन में आस ||
      मन के अहसासों की डोली ,
      पहुँची जब पिय के द्वार |
      अरमानों का ताज सजा ,
      ढूँढ़ रही उनको निगाह ||
कहाँ छुपे निष्ठुर तुम आज ,
पिया मिलन की मन में आस ||
      मादक द्रव्यों की मादकता ,
ले डूबी , तुम्हें किया निढ़ाल |
मेरी पदचापों से भी ,
न टूटा तुम्हारा ये भ्रमजाल |
पल – पल में बीती जाती है रात ,
पिया मिलन की मन में आस ||
      शुभ्र चाँदनी की सिमटी बाहें ,
      रश्मिरथी ने किया प्रकाश |
      पक्षियों की हलचल में ,
      टूटा मन वीणा का तार |
आज बिखरा मेरे सपनों का जाल ,
पिया मिलन की मन में आस ||
      हाय ! प्रियतम तनिक धैर्य धरा होता ,
      मधुशाला की हाला को तज |
      अपने जीवन में ,
      मेरा स्वप्न बुना होता |
      तो , प्रेम का रसपान कराती ,
      जीवन में मधुमास बन आती |
      खुद की अभिलाषाओं से दूर ,
      तेरा हर स्वप्न सजाती ||
अब व्याकुल मन ये करे पुकार ,
पिया मिलन की मिट गई आस ||