Wednesday, 8 June 2011

सदा प्रतीक्षारत...........‍

काम आया न मेरे महावर का रंग ,
                       गोरे हाथों में मेंहदी लगी रह गई |
आके प्रीतम ने घूँघट न खोला मेरा ,
                         मुख पे चूनर पड़ी की पड़ी रह गई ||
मेरी पूजा में क्या कुछ कमी रह गई ,
                           शीष मंदिर में जाकर झुकाया सदा |
फिर पिया से हमारा मिलन न हुआ ,
                            मन की इच्छा दबी की दबी रह गई ||
मोह माया की चूनर थी मुख पर पड़ी ,
                              काम की आँधी ने उसको उड़ाया सदा |
युग बीत गए तुम न आए पिया ,
                              मन में आशा जगी की जगी रह गई ||
छोड़ जग को पिया तेरा सुमिरन किया ,
                             तेरी छवि को है दिल में बसाया सदा |
फिर पिया की नज़र न हम पर पड़ी ,
                               मन की डोली सजी की सजी रह गई ||
( उस आलौकिक को दिल से गुहार जो विकारों से मुक्त कर एकरूप हो 
जाए | )
 

Tuesday, 7 June 2011

दिल का फ़साना

फ़साना बन गया , वो तेरा मुस्कुराना |
तेरी आँखों की मस्ती में , मेरा डूब जाना ||
      निश्छल आँखों में बसा अपनत्व ,
      जब ओट से पुकारता है |
      आँखों के कोनलों से फिसल ,
      गोलक के शून्य से मुसकुराता है
      तब मन विह्वल हो ,
      परम तत्व को पुकारता है ||
तेरी यही अदा , बना इक तराना ,
तेरी आँखों की मस्ती में , मेरा डूब जाना ||
      काफिर थे हम ,
      न घर था न ठिकाना ,
      तेरी रहमोनज़र से ,
      आँखों का मिला इक आशियाना |
      बसी हैं तेरी आँखें ,
      जब से मेरी आँखों में ,
      हर दर्द करे किनारा ,
      ये जग लगे बेगाना  |
      डूबकर इनमें ऐ साकी ,
      स्वर्ग का द्वार लगे पुराना |
तेरी ऐसी ही हस्ती पर फिदा है ज़माना ,
तेरी  आँखों मस्ती में मेरा डूब जाना ||

जीवन का यथार्थ

जीवन का यथार्थ
प्रयास में कमी ,
                 असफलता
धैर्य में कमी ,
                  निराशा
सहनशीलता में कमी ,
                  आक्रोश
आत्मविश्वास में कमी ,
                 घबराहट
ज्ञान में कमी ,
                 जटिलता
विश्वास में कमी ,
                 खेद

Sunday, 22 May 2011

ज़ख्मी दिल

 प्रतीक्षा में
भावों की अभिव्यक्ति शब्दातीत है ,
 हर क्षण जीवन का यूँ ही व्यतीत है |
यह भाव भी तुम हो ,
भावों में छुपे घाव भी तुम हो |
हर पल तुम्हें बुलाती हूँ ,
हर साँस एक आह बन पुकारती है  |
काश ! कोई आवाज़ तो सुनते ,
मेरे छुपे घाव तो गिनते |
रोज़ कोई नई बात पूँछते हो ,
ज़ख्म की गहराई को टटोलते हो ,
ज़ख्म के भरने की आशंका से
फिर उसे कुरेदते हो |
ज़ख्म भरता है तो निशान छोड़ता है ,
मेरा ज़ख्म तो मीठा अहसास देता है |
दुनिया में अब न कोई सहारा है ,

बस एक ज़ख्म ही हमारा है |

तलाश



बेचैनियों से घिरी मैं ,
जानकर भी अनजान मैं ,
अज्ञान को समेटे हुए ,
लुभावनी राह पर मैं |
अपने ही अहसासों से अनजान मैं ,
खुद की आकांक्षाओं से घिरी मैं ,
समझकर भी नादान मैं ,
तुम्हारी आँखों से मोहित मैं ,
मधुर - मुस्कान की चाह में मैं ,

प्रेम रूपी सागर में डूबी मैं ,
यादों में सदा खोई हुई मैं ,
बस मिलने को बेकरार  मैं ,
तुममें खो जाने को तैयार मैं ,
सपनों को सच करती हुई मैं ,
' प्रिय ' से मिलने को तैयार मैं ,
अंधकार से खिलते प्रकाश में मैं ,
बस उस शांति की तलाश में मैं |

मन के उद्गार


कुछ कर गुज़रने की आग हमें जीने नहीं देती ,
कुछ न कर पाने का अहसास हमें सोने नहीं देता |
यकीं की चिंगारी अश्क पीने नहीं देती ,
अटल इरादा शिकस्त पर भी रोने नहीं देता ||